कमलेश कमल मानस के कुछ प्रसंग जिनको लेकर शंका या विवाद की संभावना रहती है, उनमें एक के केंद्र में अंगद का यह अभिकथन है- “जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी॥” इसका एक अर्थ तो यह निकलता है कि यदि तू मेरा पाँव हटा सके, तो श्रीराम लौट जाएँगे, मैं […]
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